फ़ील्ड नोट
समय की पहचान: हम अपने वर्मीकम्पोस्ट को दो बार क्यों छानते हैं
GAUMAYA का हर बैग हमारे नारनौल फ़ार्म से निकलने से पहले दो बार छाना जाता है। जानिए क्यों चायपत्ती जैसी बारीक बनावट ही असली वर्मीकम्पोस्ट की पहचान है।
- Written by
- The GAUMAYA Team
- Published
- 31 May 2026
- Reading time
- 1 min
बाज़ार में मिलने वाली बहुत सी ऑर्गेनिक खादों में बिना पचे हुए गोबर के बड़े टुकड़े, टहनियाँ और कचरा होता है। इससे बैग का वज़न तो बढ़ जाता है, लेकिन मिट्टी को कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होता। असली वर्मीकम्पोस्ट दिखने और छूने में इस्तेमाल की हुई चायपत्ती जैसी होनी चाहिए—गहरे रंग की, एक जैसी और एकदम हल्की।
नारनौल में हमारे फ़ार्म पर, यह बनावट ऐसे ही नहीं मिल जाती। यह क्योरिंग बेड्स में रखे गए धैर्य और हार्वेस्ट के समय दो बार छानने की सख़्त प्रॉसेस का नतीजा है।
पहली छनाई: केंचुओं को अलग करना
70+ दिन की क्योरिंग के बाद, बेड्स की ऊपरी परत को सावधानी से निकाला जाता है। पहली छनाई में थोड़ी बड़ी जाली का इस्तेमाल होता है। इस स्टेप का मुख्य मक़सद केंचुओं (Eisenia fetida) को बिना चोट पहुँचाए उनकी खाद से अलग करना है, ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से नए बेड्स में डाला जा सके। इससे बिना गले हुए बड़े टुकड़े भी अलग हो जाते हैं।
दूसरी छनाई: बारीक और साफ़ खाद
दूसरी छनाई ही GAUMAYA की क्वालिटी तय करती है। हम बचे हुए मटेरियल को छानने के लिए 2mm की बारीक जाली का इस्तेमाल करते हैं। यह बारीक़ प्रॉसेस बचे हुए कोकून और बिना पचे हुए छोटे टुकड़ों को भी बाहर कर देती है।
जाली से जो नीचे गिरता है, वह 100% शुद्ध केंचुआ खाद होती है।
बनावट (Texture) क्यों ज़रूरी है?
एक बारीक और एक जैसी बनावट यह पक्का करती है कि खाद आपकी मिट्टी में आसानी से मिल जाए। यह मिट्टी को सख्त होने से रोकती है, जड़ों के आस-पास हवा का बहाव सुधारती है, और पूरे गमले में पानी सोखने की क्षमता को बराबर रखती है।
हम दो बार इसलिए छानते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि मिट्टी को सुधारने के लिए आपको उसमें से कचरा और टहनियाँ बीनने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए। इसका नतीजा एक बेहद असरदार और पोषण से भरपूर खाद है, जिसे आपके पौधे तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं।